सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

चारों उँगलियाँ घी में

चारों उँगलियाँ घी में


नेता जी ने जनता को भड़काते हुए कहा-"भाईयो दूसरे धर्म के लोग तुम्हारी जान के दुश्मन हैं. "लोग उन्मादी हो गए और दंगे भड़क गये. बाद में पाया गया कि नेता जी सबको समझा रहे थे -'भाइयों ऐसा मत करो जो खून  बहा है  वो इंसानी है।' नेता जी को दंगे शांत कराने  में मुख्य भूमिका निभाने के लिए  सौहार्द सम्मान  से सम्मानित किया  गया और पार्टी द्वारा दंगे भड़काने में मुख्य भूमिका निभाकर बहुमत  दिलाने हेतु पार्टी अध्यक्ष पद प्रदान किया गया।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

मॉरल हाई - लघुकथा

 इतनी बड़ी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष समेत दर्जनों अधिवक्ताओं से तीखी बहस के बाद जिला जज साहब ने अपना कोट और बैंड गुस्से में उतार कर फेंक दिया और  कोर्ट रूम में ही पुलिस बुलाकर उन पर लाठीचार्ज करा दिया. चारों ओर अफरा-तफरी मच गई. इस घटना के तुरंत बाद  आक्रोशित अधिवक्ताओं ने जिला जज की तानाशाही के विरुद्ध हड़ताल का ऐलान कर दिया तो उधर जजों के आधिकारिक संगठन की भी मीटिंग हुई जिसमें अधिवक्ताओं को उनके गुंडागर्दी वाले व्यवहार हेतु क्षमा मांगने के लिए प्रस्ताव पारित किया गया। साथ ही इस पर भी चिंता जताई कि ऐसी घटनाओं से जजों का मॉरल डाउन होता है। जब यह सूचना पुलिस लाठीचार्ज में घायल अस्पताल में भर्ती अधिवक्ताओं के संज्ञान में आई तो एक युवा अधिवक्ता व्यंग्यात्मक मुस्कान के साथ बोला - '' एक बार जज साहब पर लाठीचार्ज करा के देख लीजिए शायद मॉरल हाई हो जाये। ' Do not copy  -डॉ शिखा कौशिक नूतन 

झूठ की तरक्की -अति लघुकथा

झूठ की तरक्की -अति लघुकथा बैंक के कोने पर सालों से चाय बनाकर बेचने वाले राजू को उसका मित्र  मुन्ना छेड़ते  हुए बोला- - राजू देख ना चाय बनाने वाले कहाँ  से कहाँ पहुँच गए और तू आज तक यहीं इस खोखे पर सड़ रहा है |'' राजू मुस्कुराता हुआ बोला -'' भईया मैं झूठ नहीं बोलता |'' डॉ शिखा कौशिक  'नूतन'

कर्तव्यपरायणता - अति लघुकथा

कर्तव्यपरायणता - अति लघुकथा  मंत्री जी के निजी सचिव ने उन्हें सूचित किया कि घर से फोन आया था मंत्री जी के पिता जी की हालत नाजुक है. मंत्री जी गंभीर होते हुए बोले - उन्हें छोटा भाई देख लेगा, मेरा इस समय अस्पताल में भर्ती पूर्व मुख्यमंत्री को देखने जाना ज्यादा जरूरी है... भाई समर्थक नाराज़ हो जायेंगे.  डॉ शिखा कौशिक नूतन